फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ जैसा कोई नहीं

इतिहास में कई जनरल हुए, लेकिन फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ जैसा कोई नहीं। वो भारत के पहले ऐसे सैन्य अधिकारी थे, जिन्हें 'फील्ड मार्शल' (Field Marshal) के फाइव-स्टार रैंक से नवाजा गया।

1971 का युद्ध याद है? जब पाकिस्तान भारत को आंखें दिखा रहा था, तब सैम बहादुर के नेतृत्व में भारतीय सेना ने सिर्फ 13 दिनों में पाकिस्तानी सेना की कमर तोड़ दी थी। नतीजा? 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने एतिहासिक आत्मसमर्पण (Surrender) किया और दुनिया के नक्शे पर एक नया देश 'बांग्लादेश' उभरा। 

सैम मानेकशॉ अपनी बहादुरी के साथ-साथ अपने सेंस ऑफ ह्यूमर (Humor) के लिए भी मशहूर थे। पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्या खान और सैम पुराने दोस्त थे। विभाजन से पहले सैम ने याह्या को अपनी मोटरसाइकिल ₹1000 में बेची थी, जिसके पैसे याह्या ने कभी नहीं चुकाए। 1971 की जीत के बाद सैम ने मज़ाक में कहा था— "याह्या ने मेरे मोटरसाइकिल के पैसे तो नहीं दिए, लेकिन बदले में अपना आधा देश दे दिया।" 

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