कारगिल युद्ध में पाकिस्तान ने जिंदा पकड़ा 22 दिन तक टॉर्चर किया आंखें निकाली कान और निजी पार्ट भी काटे लेकिन उन्होंने एक शब्द भी कुछ नहीं बताया

कैप्टन सौरभ कालिया कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले पहले भारतीय सेना अधिकारी बने। उन्हें पांच अन्य सैनिकों के साथ पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया था और 22 दिनों तक क्रूर यातनाएं दी गईं, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।

अगस्त 1997 में सौरभ कालिया चयन भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में हुआ और 12 दिसंबर 1998 को वे लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त कर 4 जाट रेजिमेंट में शामिल हुए। जनवरी 1999 में उनकी पहली तैनाती कारगिल सेक्टर में हुई - जहां कुछ ही महीनों बाद उन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

15 मई 1999 को कैप्टन कालिया और पांच सैनिक नियमित गश्त पर थे, तभी पाकिस्तानी सेना ने उन पर घात लगाकर हमला किया और उन्हें जिंदा पकड़ लिया। उन्हें 22 दिनों तक बंदी बनाकर रखा गया और यातनाएं देकर मार डाला गया। उनके शव पाकिस्तानी सेना द्वारा 9 जून 1999 को लौटाए गए।

कैप्टन सौरभ के पिता ने बताया कि उनके कानों में गर्म लोहे की छड़ें घुसाई गईं, आंखें निकाल ली गईं, नाक, कान और निजी अंग का’ट डाले गए । शरीर को तड़पा-तड़पा कर ज’ला दिया गया, लेकिन उन्होंने दुश्मन को एक शब्द तक नहीं बताया। उनका अद्वितीय साहस और मानसिक दृढ़ता, दुश्मन के हर अत्याचार से भी नहीं टूटा।

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